मेरा नाम नितिन है और यह कहानी उस समय की है जब मैं 24 साल का था और अपने माता-पिता के साथ दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में रहता था। हमारे घर के बगल में शर्मा परिवार रहता था – मिस्टर शर्मा, उनकी पत्नी सुमन आंटी, और उनकी बेटी कोमल। दीवाली की रात पड़ोसन कोमल की चुदाई ।
कोमल उस समय 22 साल की थी। वो कॉलेज में फाइनल ईयर की छात्रा थी और मैंने उसे हमेशा एक अच्छी पड़ोसन की नजर से ही देखा था। हमारी दोस्ती कई सालों पुरानी थी – बचपन से ही हम एक-दूसरे के घर आते-जाते थे, मिलकर खेले थे, पढ़ाई की थी। लेकिन कभी भी मेरे मन में उसके प्रति कोई गलत भावना नहीं आई थी। वो मेरी दोस्त थी, बस।
कोमल का फिगर 36-26-34 का था। यह मैंने तब जाना जब एक बार गलती से उसकी डायरी मेरे हाथ लग गई थी। उसमें उसने अपने माप लिखे हुए थे। 5 फुट 6 इंच की हाइट, गोरा रंग, लंबे काले बाल, और वो फिगर जो किसी भी मर्द का दिल बहला सकता था। लेकिन मैंने उसे कभी उस नजर से नहीं देखा था। मेरे लिए वो बस कोमल थी, मेरी पड़ोसन, मेरी दोस्त।
हमारे मोहल्ले में दीवाली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता था। हर साल की तरह इस साल भी तैयारियाँ जोरों पर थीं। मेरे घर में माँ रंगोली बना रही थीं और पापा बाजार से सामान लेने गए थे। मैं शाम को बाहर आया तो देखा कोमल अपने घर के दरवाजे पर खड़ी थी।
“नितिन, आओ ना, मेरी मदद करो,” उसने मुझे आवाज दी।
मैं उसके पास गया। वो दीये सजा रही थी। उसने साधारण सी साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन उस पर गुलाबी रंग का ब्लाउज था जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था।
“क्या करना है?” मैंने पूछा।
“ये दीये लाइन से लगाने हैं और फिर बाद में पटाखे भी तो जलाने हैं,” वो बोली।
हम दोनों मिलकर काम करने लगे। बातें हो रही थीं – उसके कॉलेज की, मेरी नौकरी की, पुरानी यादों की। वो हंसते हुए बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसके गालों पर दो गड्ढे पड़ते थे जो मुझे हमेशा अच्छे लगते थे।
शाम ढलने लगी थी। आसमान में धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगा था और घर-घर में दीये जलने शुरू हो गए थे। पूरा मोहल्ला रोशनी से जगमगा रहा था। बच्चे पटाखे जला रहे थे, आतिशबाजी हो रही थी।
कोमल ने मुझसे कहा, “नितिन, रुको, मैं अभी आती हूँ। मुझे कपड़े बदलने हैं।”
मैंने कहा, “ठीक है, जल्दी आना।”
कुछ देर बाद जब वो वापस आई तो मेरी साँसें थम सी गईं। उसने एक काली रंग की साड़ी पहनी थी जिसका ब्लाउज बैकलेस था। पीठ पूरी तरह से खुली थी, कंधे नंगे थे, और ब्लाउज की कटिंग इतनी गहरी थी कि उसकी कमर तक जा रही थी। उसने बाल खुले छोड़े हुए थे और कानों में लंबे झुमके पहने थे।
वो मेरे सामने आई और मुस्कुराते हुए बोली, “कैसी लग रही हूँ?”
मैं उसे देखता ही रह गया। मेरे मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे। वो इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मेरी आँखें उस पर से हट ही नहीं रही थीं। उसकी पीठ की त्वचा दीयों की रोशनी में चमक रही थी, उसकी कमर की लचक मुझे मदहोश कर रही थी।
“नितिन… बोलो ना,” उसने शर्माते हुए कहा।
“बहुत… बहुत खूबसूरत,” मैंने हकलाते हुए कहा।
मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई थी। पहली बार मैंने कोमल को किसी और नजर से देखा था। वो मेरी दोस्त नहीं, बल्कि एक खूबसूरत औरत लग रही थी जिसका शरीर मुझे अपनी ओर खींच रहा था।
“सचमें?” उसने आँखें झुकाते हुए पूछा।
“हाँ, बिल्कुल सच,” मैंने कहा।
हम दोनों पटाखे जलाने के लिए बाहर निकले। रात हो चुकी थी और आसमान में रॉकेट छोड़े जा रहे थे। हमने भी कुछ पटाखे खरीदे और एक खुली जगह पर जाकर जलाने लगे।
कोमल बहुत उत्साहित थी। वो बच्चों की तरह खुश हो रही थी जब कोई रॉकेट ऊपर जाता और फूलों की तरह फैलता। उसकी खुशी देखकर मुझे भी अच्छा लग रहा था, लेकिन मेरी नजरें बार-बार उसकी खुली पीठ और उसकी कमर पर जा रही थीं।
रात के करीब 10 बजे थे। मोहल्ले में धीरे-धीरे शांति होने लगी थी। बच्चे सोने चले गए थे और बड़े लोग भी अपने-अपने घरों में बैठ गए थे। कोमल के माता-पिता किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे और अगले दिन सुबह ही लौटने वाले थे। मेरे माता-पिता भी थक कर सो चुके थे।
“चलो, आखिरी पटाखे जलाते हैं,” कोमल ने कहा।
हम दोनों ने मिलकर कुछ और पटाखे जलाए। धुएँ का घना बादल था और आवाजें गूंज रही थीं। जब आखिरी पटाखा जला, तो हम दोनों थक कर एक पुरानी खटिया पर बैठ गए जो वहाँ रखी हुई थी।
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हमारे बगल में एक पुराना सा बल्ब जल रहा था जो हमें हल्की रोशनी दे रहा था। बाकी जगह अंधेरा था। हम दोनों खटिया पर बैठे थे और सांस फूल रही थी।
“क्या मज़ा आया ना,” कोमल ने कहा।
“हाँ, बहुत मज़ा आया,” मैंने कहा।
थकान के कारण हम दोनों धीरे-धीरे खटिया पर लेट गए। हमारे बीच थोड़ी दूरी थी, लेकिन वो खटिया इतनी संकरी थी कि हमारे कंधे आपस में टकरा रहे थे।
मैंने कोमल की ओर देखा। वो छत की ओर देख रही थी। उसकी गर्दन की लाइन, उसकी क्लेविकल बोन, और उसकी खुली पीठ – सब कुछ मुझे मदहोश कर रहा था। मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल हो रही थी जो पहले कभी नहीं हुई थी।
“कोमल,” मैंने धीमी आवाज में कहा।
“हाँ,” उसने मुड़कर देखा।
हमारी आँखें मिलीं। उसकी आँखों में कुछ अजीब सा नशा था। शायद थकान, शायद कुछ और। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और धीरे से उसके हाथ को छुआ।
उसने अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश की, लेकिन फिर रुक गई।
पहली छुअन
मैंने हिम्मत की और अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया। उसकी त्वचा गरम थी, मुलायम थी। मेरी उँगलियाँ उसकी पीठ की खूबसूरती को महसूस कर रही थीं।
कोमल ने मुझे एक अजीब सी नजर से देखा। उसकी आँखों में गुस्सा था, लेकिन साथ ही कुछ और भी था – शर्म, उत्सुकता, या शायद इच्छा।
“नितिन, ये क्या कर रहे हो?” उसने धीमी आवाज में कहा।
“मुझे नहीं पता,” मैंने सच कहा, “पर मैं रोक नहीं पा रहा हूँ।”
मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर फिराया। उसकी कमर की लचक, उसकी त्वचा की नरमाहट – सब कुछ मुझे पागल बना रहा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि कोमल को छूने पर मुझे ऐसा महसूस होगा।
उसने मुझे गुस्से से देखा, लेकिन वो गुस्सा असली नहीं लग रहा था। वो एक ऐसा गुस्सा था जो औरतें दिखाती हैं जब वो चाहती हैं लेकिन कहती नहीं।
मैं समझ गया कि वो नाराज़ नहीं है। वो बस शर्मा रही है, डर रही है, लेकिन उसके अंदर भी कुछ जाग रहा है।
मैंने हिम्मत की। मैं उठा और उसके पीछे गया। मैंने धीरे से अपने हाथों से उसके ब्लाउज की डोरी खोलनी शुरू की।
“नितिन, नहीं… ये गलत है,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ कमजोर थी।
“मैं जानता हूँ,” मैंने कहा और उसके ब्लाउज की डोरी खोल दी।
ब्लाउज ढीला हो गया। मैंने उसे आगे से पकड़ा और खींचकर उतार दिया। अब कोमल सिर्फ ब्रा में थी, उसकी पीठ पूरी तरह से नंगी थी। दीयों की हल्की रोशनी में उसकी पीठ का गोरापन मुझे मदहोश कर रहा था।
मैंने उसकी पीठ पर अपने होंठ रखे। एक हल्का सा चूमा दिया। वो कांप गई।
“नितिन… प्लीज़,” उसने कहा, लेकिन वो उठी नहीं।
मैंने उसकी पीठ पर किस करना जारी रखा। मेरे होंठ उसकी गर्दन से लेकर उसकी कमर तक चले गए। मैंने उसकी कमर को चूमा, उसकी पीठ के दोनों तरफ चूमने लगा।
कोमल की साँसें तेज हो गई थीं। वो मेरी तरफ पीठ किए लेटी हुई थी और मैं उसकी पीठ चूम रहा था।
मैंने अपने हाथों से उसकी कमर को सहलाना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरे हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी जाँघों की ओर बढ़ने लगे। वो कांप रही थी, लेकिन उसने मना नहीं किया।
“कोमल, तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने उसकी कान में फुसफुसाते हुए कहा।
उसने कुछ नहीं कहा। वो बस लेटी रही।
मैंने उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया। मेरे हाथ उसकी पेट पर थे और मेरा लौड़ा उसकी पीठ से टकरा रहा था। वो महसूस कर सकती थी कि मैं कितना उत्तेजित था।
मैंने अपने हाथ ऊपर बढ़ाए और उसके स्तनों को पकड़ लिया। वो 36 इंच के स्तन मेरे हाथों में आते ही मैं पागल हो गया। मैंने उन्हें दबाना शुरू किया, सहलाना शुरू किया।
“आह…” कोमल से एक हल्की सी आवाज निकली।
यह वो आवाज थी जो मुझे और उत्तेजित कर गई। मैंने उसे पलटा और अब वो मेरी तरफ मुँह किए लेटी थी। उसकी आँखें बंद थीं और उसके होंठ कांप रहे थे।
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे। एक हल्का सा चूमा दिया। वो कांप गई, लेकिन उसने मुझे धक्का नहीं दिया। मैंने चूमना जारी रखा, और फिर धीरे-धीरे मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी।
हमारे बीच एक किस शुरू हुआ। एक गरम, जुनूनी किस जिसमें हम दोनों एक-दूसरे को खा रहे थे। मैंने उसकी जीभ को चूसा, उसके होंठों को काटा, और उसके मुँह को पूरी तरह से अपना बना लिया।
कुछ देर बाद जब हम अलग हुए तो कोमल की साँसें फूल रही थीं। उसकी आँखें खुली थीं और उनमें एक अजीब सा नशा था।
“नितिन, हम ये क्या कर रहे हैं?” उसने पूछा।
“जो हम दोनों चाहते हैं,” मैंने कहा।
मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और उसे हटा दिया। अब कोमल के स्तन पूरी तरह से नंगे थे। उसके निप्पल गुलाबी थे और कड़े हो चुके थे। मैंने उन्हें अपने हाथों में लिया और दबाना शुरू किया।
“आह… धीरे…” वो बोली।
मैंने एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। उसका निप्पल मेरी जीभ के नीचे कड़ा हो रहा था। मैंने उसे काटा, चूसा, और चाटा। कोमल की आवाजें निकल रही थीं – हल्की-हल्की कराहें जो रात की खामोशी में गूंज रही थीं।
मैंने दूसरे स्तन को भी वैसे ही चूमा और चूसा। वो अपने हाथों से मेरे सिर को अपने स्तनों पर दबा रही थी। उसे मज़ा आ रहा था, यह साफ झलक रहा था।
मैंने धीरे-धीरे अपने होंठ उसके पेट पर ले गया। उसका पेट बिल्कुल सपाट था, 26 इंच की कमर जो मुझे पागल बना रही थी। मैंने उसके नाभि को चूमा, उसके पेट को चाटा।
“नितिन… प्लीज़…” वो बोल रही थी, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो रोक रही है या बुला रही है।
मैंने उसकी साड़ी को ऊपर उठाना शुरू किया। धीरे-धीरे उसकी जाँघें सामने आ गईं। वो सफेद रंग की थीं, मुलायम, और बिल्कुल चिकनी। मैंने उसकी जाँघों को चूमा, अंदर की तरफ, जहाँ की त्वचा और भी नरम होती है।
कोमल की टाँगें थोड़ी खुल गईं। मैंने देखा कि उसने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी। मैंने उसके योनि पर हाथ रखा और महसूस किया कि वो गीली हो चुकी थी।
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“तुम भी चाहती हो ना,” मैंने उससे पूछा।
उसने शर्माते हुए अपना चेहरा एक तरफ कर लिया। यह उसकी हाँ थी।
मैंने उसकी पैंटी को एक तरफ किया और उसकी योनि को देखा। वो गुलाबी रंग की थी, छोटी-छोटी झाँटें थीं, और पूरी तरह से गीली थी। मैंने उस पर अपने होंठ रखे और चाटना शुरू कर दिया।
“ओह गॉड… नितिन…” वो चीखी।
मैंने उसकी योनि को अपनी जीभ से चाटा। उसका स्वाद मीठा-खट्टा था, एक अजीब सा नशा जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मैंने उसकी क्लिटोरिस को चूसा, उसके छेद में अपनी जीभ डाली, और उसे पागलों की तरह चाटता रहा।
कोमल अपनी कमर उठा-उठा कर मेरे मुँह पर अपनी योनि दबा रही थी। उसकी आवाजें तेज हो गई थीं – “आह… हाँ… और जोर से… प्लीज़…”
मैंने उसकी योनि में दो उँगलियाँ डाल दीं। वो गीली थी, गरम थी, और मेरी उँगलियों को अपनी तरफ खींच रही थी। मैंने उँगलियों को अंदर-बाहर करना शुरू किया और साथ में उसकी क्लिटोरिस को भी चूसता रहा।
कुछ ही देर में कोमल का शरीर कांपने लगा। उसने मेरे सिर को अपनी योनि पर जोर से दबाया और एक लंबी आवाज निकाली। वो झड़ चुकी थी।
मैंने उसकी योनि से अपना मुँह हटाया। उसका चेहरा लाल था और आँखों में एक अजीब सा नशा था। मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला। वो 7 इंच लंबा और काफी मोटा था, और पूरी तरह से कड़ा हो चुका था।
कोमल ने मेरे लौड़े को देखा और उसकी आँखें बड़ी हो गईं। “ये तो बहुत बड़ा है,” उसने कहा।
“डरो मत,” मैंने कहा और उसके मुँह के पास अपना लौड़ा ले गया।
“नहीं नितिन, मैंने कभी नहीं किया…” उसने मना किया।
“कोई बात नहीं, मैं सिखाता हूँ,” मैंने कहा।
मैंने उसके होंठों पर अपने लौड़े का सुपारा रगड़ा। धीरे-धीरे उसने अपना मुँह खोला और मैंने अपना लौड़ा अंदर डाल दिया।
वो शुरू में उलझन में थी, लेकिन फिर धीरे-धीरे चूसने लगी। उसकी गरम और गीली जीभ मेरे लौड़े पर लग रही थी। मैंने उसके सिर को पकड़ा और अपना लौड़ा उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लगा।
“चूसो… और जोर से…” मैंने कहा।
वो चूस रही थी, हालांकि उसे उतना आता नहीं था, लेकिन उत्साह बहुत था। मैंने उसके मुँह को चोदना शुरू किया। कभी धीरे, कभी तेज। उसकी आँखों में आँसू आ रहे थे, लेकिन वो रुकी नहीं।
कुछ देर बाद मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला। मुझे उसकी योनि में डालना था, उसे पूरी तरह से चोदना था।
मैंने कोमल को खटिया पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाईं। उसकी योनि फिर से गीली हो चुकी थी। मैंने अपने लौड़े का सुपारा उसके छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया।
“आह… दर्द हो रहा है…” वो चीखी।
मेरा आधा लौड़ा अंदर चला गया था। उसकी योनि बहुत टाइट थी, जैसे किसी कसी हुई मुट्ठी में मेरा लौड़ा फँसा हो।
“थोड़ा सब्र करो,” मैंने कहा और धीरे-धीरे अपना पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया।
कोमल दर्द से कराह रही थी। उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे। मैंने रुक कर उसके स्तनों को सहलाया, उसके होंठों को चूमा।
“अब ठीक है?” मैंने पूछा।
थोड़ी देर बाद उसने हाँ में सिर हिलाया। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू किया। शुरू में धीरे, फिर तेज़।
“आह… हाँ… अब मज़ा आ रहा है…” वो बोली।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई। खटिया की आवाजें आ रही थीं – चर-चर, चर-चर। हम दोनों की साँसें तेज हो गई थीं और पसीना निकल रहा था।
मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरे धक्के लगाने लगा। मेरा लौड़ा उसकी योनि के अंदर-बाहर हो रहा था और वो मज़े से कराह रही थी।
“और जोर से… हाँ… वहीं… प्लीज़…” वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसे कई पोज़ीशन में चोदा। पहले मिशनरी में, फिर उसे घोड़ी बनाकर पीछे से, फिर उसे अपनी गोद में बिठाकर। हर पोज़ीशन में वो नए-नए मज़े ले रही थी।
गांड मारना
करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसकी गांड को देखा। वो गोल, सफेद, और बिल्कुल साफ थी। मैंने सोचा कि क्यों ना इसे भी ट्राई किया जाए।
मैंने अपना लौड़ा उसकी गांड के छेद पर रखा।
“नहीं नितिन, वहाँ मत डालो… बहुत दर्द होगा…” वो डरते हुए बोली।
“एक बार ट्राई करते हैं,” मैंने कहा और एक जोरदार धक्का लगाया।
मेरा सुपारा अंदर चला गया। कोमल दर्द से चीख पड़ी।
“बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज़ निकालो… मैं मर जाऊँगी…” वो रोने लगी।
लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी। मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लौड़ा उसकी गांड में डाल दिया। वो बहुत टाइट थी, उसकी योनी से भी ज़्यादा। मैंने धक्के लगाने शुरू किए।
कोमल रो रही थी, दर्द से कराह रही थी। उसकी गांड मेरी पकड़ में थी और मैं उसे जमकर चोद रहा था।
“प्लीज़… बस करो… मुझसे नहीं हो रहा…” वो रोती हुई बोली।
लेकिन मैं रु;-क नहीं सकता था। मैंने और जोर-जोर से धक्के लगाए। उसकी गांड का कसाव मुझे बेहद मज़ा दे रहा था।
कुछ देर बाद जब मैं झड़ने वाला था, तो मैंने अपना लौड़ा उसकी गांड के अंदर ही छोड़ दिया। गरम पानी उसकी गांड में भर गया और मैं थक कर उसके ऊपर गिर पड़ा।
हम दोनों थक कर लेटे हुए थे। कोमल रो रही थी, लेकिन साथ में उसके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि भी थी।
“तुमने मुझे बहुत दर्द दिया,” उसने कहा।
“माफ़ करना,” मैंने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
हम दोनों नंगे लेटे हुए थे और एक-दूसरे को देख रहे थे। दीयों की रोशनी में उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था।
“क्या हम फिर से ऐसा करेंगे?” मैंने पूछा।
उसने शर्माते हुए मुस्कुराया और अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया। यह उसकी हाँ थी।
उस रात दीवाली के दीयों की रोशनी में, हम दोनों ने एक नया रिश्ता शुरू किया था। एक ऐसा रिश्ता जो दोस्ती से आगे था, शारीरिक आकर्षण से भरा हुआ था, और जो हमारी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा।
इसके बाद हम कई बार मिले, कई बार चुदाई की। लेकिन वो पहली रात, दीवाली की रात, हमेशा मेरी यादों में ताजा रहेगी – जब मैंने अपनी पड़ोसन कोमल को उसकी गांड तक मारी थी, और उसने रोते हुए भी मज़ा लिया था।
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